साम्‍प्रदायिकता

Cow(ard) politics — Something Bovine, Nothing Divine

April 22nd, 2015 by Smash Fascism | No Comments

By Sourav Banerjee:
It is the high time that the old rhetorics of cow(ard) politics should be challenged, based on the central question that did Hindus, especially the Vedic Indians, never consume beef?


‘लव जेहाद’ की असलियत – इतिहास के आईने में

September 8th, 2014 by Smash Fascism | No Comments

साथ ही इस तरह के मिथक हिंदू महिलाओं की असहायता, नैतिक मलिनता और दर्द को उजागर करते हुए उन्हें अक्सर मुसलमानों के हाथों एक निष्क्रिय शिकार के रूप में दर्शाते हैं.


जन अदालत में उजागर हुई आईबी की साम्प्रदायिक जेहनियत

June 20th, 2012 by Smash Fascism | No Comments

खुफिया एजेंसियों की साम्प्रदायिकता और आतंकवाद विषय पर आयोजित जन अदालत में लोगों ने अपना पक्ष रखा। इसमें आतंकवाद के नाम पर पीड़ित किये जा रहे लोगों ने अपनी व्यथा सुनाई कि किस तरह से महिलाएं और बच्चे मानसिक प्रताड़ना का शिकार बन रहे हैं।


Frontline: A decade of shame

February 23rd, 2012 by Smash Fascism | No Comments

The Zakia Jafri case has begun to symbolise the struggle for justice for all the riot victims and is reaching a crucial stage. It is the only case in which Modi is named as an accused and is, therefore, seen as critical in nailing the perpetrators of the pogrom.


On Hindutva Politics and Terror

November 22nd, 2011 by Smash Fascism | No Comments

THE Saffron Condition: Politics of Repression and Exclusion in Neolibral India is divided into three main sections, namely, Saffronisation and the Neolibral State, Logic of Caste in New India, and State and Human Rights. The book deals with the day-to-day and larger politics of the Hindutva outfits.


मुसलमान होने का बोझ

November 9th, 2011 by Smash Fascism | No Comments

दिल्ली में बम धमाकों और बटला हाउस ‘मुठभेड़’ के तीन साल बाद भी जामिया नगर और दुसरे मुस्लिम इलाकों के निवासी डर मे जी रहे हैं। एक ऐसी स्थिति बना दी गई है कि हर मुसलमान को, आतंकवादी नहीं तो कम से कम संदिग्ध या आतंकी समर्थक के रूप में देखा जाता है। एक बदनाम एस एम एस भी है कि: “हर मुसलमान आतंकवादी नहीं होता, लेकिन हर आतंकवादी मुसलमान है।” जो पहली बार जुलाई 2006 के मुंबई धमाके के बाद लोगों ने एक-दूसरे को भेजना शुरू किया था, आज भी प्रचारित किया जा रहा है।


भरतपुर हत्याकांड: प्राथमिक रिपोर्ट

September 27th, 2011 by Smash Fascism | 1 Comment

‘बर्बरता के विरुद्ध’ को  ईमेल से प्राप्‍त हुई ‘डीएसयू’ की रिपोर्ट ‘हिंदुस्तान में हिंदुओं का राज है, मुसलमानों का कौन है?’ जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के 11 छात्रों की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम राजस्थान के भरतपुर जिले में हुए गोपालगढ़ हत्याकांड के कारणों और घटनाक्रम का पता लगाने के लिए 25 सितंबर को गोपालगढ़ और […]


भगवा, पुलिस और गुर्जरों का निशाना बने अल्पसंख्यक

September 22nd, 2011 by Smash Fascism | No Comments

पीयूसीएल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मृतकों और घायलों की स्थिति देखकर इस बात का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिर्फ गोलीबारी ही नहीं, बल्कि लोगों को निशाना बनाकर उन्हें जलाया भी गया. चूंकि गोलीबारी के बाद मस्जिद परिसर पुलिस के नियंत्रण में था इसलिए यह जांच करने की जरूरत है कि यह किसने किया. प्रत्यक्षदशियों के आरोप हैं कि इस घटना के पीछे स्थानीय पुलिस के अलावा गुर्जर नेता और आरएसएस, बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ता भी शामिल हो सकते हैं. आरोप यह लगाया गया है कि ये लोग घटना से पहले ही थाने में थे, जहां दोनों समुदायों के बीच समझौते के लिए बैठक चल रही थी तथा इन्हीं लोगों ने दबाव बनाकर कलेक्टर से फायरिंग के आदेश लिखवाए. इसकी भी जांच करवाए जाने की आवश्यकता है.


अन्ना के आंदोलन का साम्प्रदायिक चरित्र

September 5th, 2011 by Smash Fascism | No Comments

अन्ना आंदोलन के रणनीतिकार इस बात को सिरे से नकारते है कि उनका हिन्दुत्ववादी ताकतों से कोई सीधा संबंध है, लोगों ने उनकी बातों का भरोसा भी किया, लेकिन जो तथ्य और परिस्थितिजन्य साक्ष्य है, वे चीख चीख कर यह बता रहे है कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग व समर्थन पर ही टिका हुआ आंदोलन था, टीम अन्ना के सदस्य इस सत्य को स्वीकारे अथवा नहीं स्वीकारे, स्वयं आरएसएस आधिकारिक रूप से इस सत्य को स्वीकार चुका है…


गुजरात 2002

September 1st, 2011 by Smash Fascism | 1 Comment

भूतों के झुण्ड गुज़रते हैं
कुत्तों-भैसों पर हो सवार
जीवन जलता है कण्डों-सा
है गगन उगलता अन्धकार।

यूँ हिन्दू राष्ट्र बनाने का
उन्माद जगाया जाता है
नरमेध यज्ञ में लाशों का
यूँ ढेर लगाया जाता है।


फ़ॉर्बिसगंज पुलिस दमन : बर्बरों के ”सुशासन” का असली चेहरा

August 27th, 2011 by Smash Fascism | No Comments

पिछली 3 जून को अररिया ज़िले के फ़ार्बिसगंज मण्डल के भजनपुर गाँव में एक कारख़ाना मालिक की शह पर पुलिस ने इन्सानियत को शर्मसार करने वाला बर्बरता का ऐसा ताण्डव किया जिसकी मिसाल आज़ाद भारत में जल्दी नहीं मिलेगी। आदेश मिलते ही पुलिस ने निर्दोष गाँववालों को सबक़ सिखाने के लिए अपनी हैवानियत और वहशीपन का जो रूप दिखाया, उसके दृश्यों को देखकर रूह काँप उठती है। पुलिस ने गाँववालों को उनके घरों तक खदेड़- खदेड़कर मारा। 18 वर्षीय मुस्तफ़ा अंसारी को पुलिस ने चार गोलियाँ मारीं जिससे वह मृतप्राय अवस्था में ज़मीन पर गिर पड़ा।


मुम्‍बई की ‘स्पिरिट’ और भारत की आत्‍मा

July 31st, 2011 by Smash Fascism | No Comments

मुंबई में हाल ही में हुए बम धमाकों के बाद सुब्रमणियम स्‍वामी ने डीएनए में सांप्रदायिक नजरिए से और घृणा फैलाने वाला एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था ‘इस्‍लामी आतंकवाद का खात्‍मा कैसे किया जाए – एक विश्‍लेषण’. इस लेख पर प्रबुद्ध नागरिकों ने त्‍वरित एवं तीखी प्रतिक्रिया की। फिल्‍मकार राकेश शर्मा ने डीएनए में ही स्‍वामी के इस लेख का जवाब लिखा। हम अंग्रेजी में प्रकाशित इस लेख का हिंदी अनुवाद ‘बर्बरता के विरुद्ध’ के पाठकों के लिए प्रस्‍तुत कर रहे हैं।



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फ़ासीवाद, धार्मिक कट्टरपंथ, सांप्रदायिकता संबंधी स्रोत सामग्री

यहां जिन वेबसाइट्स या ब्‍लॉग्‍स के लिंक दिए गए हैं, उन पर प्रकाशित विचारों-सामग्री से हमारी पूरी सहमति नहीं है। लेकिन एक ही स्‍थान पर स्रोत-सामग्री जुटाने के इरादे से यहां ये लिंक दिए जा रहे हैं।
 

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