बाबरी मस्जिद/Babari Majid

आनंद पटवर्धन की फिल्म “राम के नाम”

November 28th, 2011 by Smash Fascism | No Comments

यह फिल्म, राम के नाम को हर तरफ से जाचंती है फिर विश्व हिंदू परिषद के राम को भी दिखाती है। आनंद उस साम्‍प्रदायिकता के सच को उजागर करते हैं, जो सत्ता हासिल करने के लिए राम के नाम का प्रयोग करती हुई लाशों का ढेर लगाती है। फिल्म धार्मिक असहिष्णुता के खिलाफ मानवता को सामने रखती है।


Why is the law on Communal Violence specifically addressing protection of religious minorities?

June 12th, 2011 by Smash Fascism | No Comments

PRESS RELEASE Why are secular and civil liberty activists disappointed with the NAC Draft Bill Draft ‘Prevention of Communal and Targeted Violence (Access to Justice and Reparations) Bill, 2011 The need for a new legislative mechanism, to deal with communal violence targeting religious minorities, was confirmed by the experience of the 1983 Nellie killings in […]


बाबरी मस्जिद फैसला और हिंदी लेखक

November 17th, 2010 by Smash Fascism | 3 Comments

परिचर्चा ◙ धीरेश अयोध्या की बाबरी मस्जिद को केंद्र में रखकर मुसलमानों के खिलाफ नफरत की जो मुहिम शुरू की थी, वह इस मस्जिद के विध्वंस के जरिए परवान चढ़ी थी। इस खूनी-आपराधिक मुहिम की बदौलत केंद्र और कई सूबों की सत्ता संघ परिवार समर्थित राजनीतिक दलों ने हासिल कर दिखा दिया था कि उसने […]


सेक्‍युलर पार्टियों के स्टैंड लेने का वक़्त : जस्टिस राजिंदर सच्चर

November 3rd, 2010 by Smash Fascism | 4 Comments

राम जन्मभूमि विवाद महज एक धार्मिक मसला नहीं है मगर पिछले दो दशकों से यह भारत के राजनीतिक मानसपटल पर काबिज है. इस फैसले को आप किस तरह देखते हैं?   इस फैसले का सार दो शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है: अपराध कथा. 1992 में एक अपराध हुआ था. बारी मस्जिद गिराई गई थी. […]


अयोध्या फैसलाः हमारा नज़रिया

October 30th, 2010 by Smash Fascism | 4 Comments

28 सितम्बर को अयोध्या विवाद को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तीन सदस्यों वाली लखनऊ बेंच ने अपना फैसला सुना दिया। इस फैसले के मुताबिक इस बेंच के न्यायाधीशों ने 2:1 के बहुमत से यह तय किया कि अयोध्या की 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बाँटकर तीनों पक्षों को दे दिया […]


बाबरी मस्जिद से पहले भी वहां मस्जिद ही थी – डा. सूरजभान

October 16th, 2010 by Smash Fascism | No Comments

चूंकि 18वीं सदी के मध्य भाग से पहले राम चबूतरों की मौजूदगी का कोई साहित्यिक या ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है, चबूतरों स्तंभ आधारों तथा कब्रों का फर्श में धंसता हुआ निर्माण, 18वीं-19वीं सदियों का माना जा सकता है। यह ज्ञात ही है कि 1857 से पहले अयोध्या में दंगे हुए थे और इनमें कुछ खून-खराबा हुआ था। बहरहाल, अवध के नवाब के हस्तक्षेप से, दोनों समुदायों के बीच के टकराव को हल कर लिया गया था।


आस्था पर ज़ोर, क़ानून कमज़ोर

October 16th, 2010 by Smash Fascism | No Comments

(अयोध्या विवाद को लेकर उच्च अदालत के फैसले के बारे में न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव, दिल्ली का वक्तव्य) अयोध्या विवाद को लेकर उच्च न्यायालय के आए आदेश के सन्दर्भ में जनता के तमाम हिस्सों द्वारा दिखाए गए संयम और एक नया पन्ना पलटने की उनकी ख्वाहिश का जहां ‘न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव’ स्वागत करती है, वहीं उसका […]


सवाल करना भी ज़ुर्म है

October 12th, 2010 by Smash Fascism | No Comments

शबनम हाशमी  वे सारे लोग जो मुसलमान औरतों के हालात पर आंसू बहाते नहीं थकते वे आज जश्‍न मना रहे हैं हिंदुस्‍तान में शांति का। वे कह रहे हैं कितना संयम बरत रहा है हिंदुस्‍तान। कोई हिंसा नहीं। आम मुसलमान उन्‍हें याद आ गया है जो सिर्फ रोज़ी-रोटी चाहता है। वे बहुत खुश है फैसले […]


युवा, मुसलमान और अयोध्‍या पर चिंतनशील

October 10th, 2010 by Smash Fascism | No Comments

हम अयोध्‍या मामले पर कई लेखकों और इतिहासकारों की टिप्‍पणी या लेख देने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में द हिंदू में छपे एक लेख को हूबहू यहां दे रहे हैं। समय मिलते ही इसका अनुवाद करके यहां पोस्‍ट करने का प्रयास किया जाएगा। – मॉडरेटर ———————————————————————————————-  Young, Muslim and reflecting on Ayodhya  […]


एक शर्मनाक और चौंका देने वाला निर्णय

October 8th, 2010 by Smash Fascism | No Comments

निवेदिता मेनन  (kafila.org से साभार) इस फैसले के प्रभाव, लोकतंत्र के लिए इसके निहितार्थों, और आने वाले भविष्य के बारे में यह जो कुछ भी कहता है- इस सबने मुझे तोड़ कर रख दिया है.मीडिया में एक के बाद एक आडम्बर प्रेमी महानुभावों द्वारा इस फैसले में किये गए समझौते की परिपक्वता के बारे दिए […]


फैसला मस्जिद विध्वंस को नजरंदाज करता है

October 7th, 2010 by Smash Fascism | No Comments

एस. इरफान हबीब  किसी अन्य मुद्दे ने स्वतंत्र भारत को उतना परेशान नहीं किया है जितना अयोध्या विवाद ने। इसका परिणाम 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद ढहाये जाने के रूप में सामने आया था, जिसके बाद पूरे देश में हिंसा का तांडव हुआ। इसने लगभग अकेले ही 1990 के दशक के अंत में एक राजनीतिक […]


मस्जिद विध्‍वंस को जायज़ ठहराने वाला फैसला

October 6th, 2010 by Smash Fascism | No Comments

टी.आर. अंध्‍याराजन  (5.10.2010 के ‘द हिंदू’ से साभार)  अगर मस्जिद ढहाई नहीं गयी होती, तब भी क्‍या न्‍यायालय ने विवादित स्‍थल का विभाजन और बंटवारा इसी ढंग से करने का निर्देश दिया होता?  6 दिसंबर 1992 को मस्जिद ढहाने की बर्बर घटना की निन्‍दा न करना अयोध्‍या मामले में इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के फैसले का […]



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फ़ासीवाद, धार्मिक कट्टरपंथ, सांप्रदायिकता संबंधी स्रोत सामग्री

यहां जिन वेबसाइट्स या ब्‍लॉग्‍स के लिंक दिए गए हैं, उन पर प्रकाशित विचारों-सामग्री से हमारी पूरी सहमति नहीं है। लेकिन एक ही स्‍थान पर स्रोत-सामग्री जुटाने के इरादे से यहां ये लिंक दिए जा रहे हैं।
 

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