प्रतिरोध/Resistance

बर्टोल्ट ब्रेख्त के फासीवाद विरोधी 7 नाटक – ख़ौफ़ की परछाइयां

April 16th, 2016 by Smash Fascism | No Comments

बर्टोल्ट ब्रेख्त के फासीवाद विरोधी 7 नाटक – ख़ौफ़ की परछाइयां


लेखक, कलाकार को बर्बरता का प्रतिरोध करना होगा: मंगलेश डबराल

April 22nd, 2015 by Smash Fascism | No Comments

यह आश्‍चर्य की बात नहीं कि मोदी की जीत के बाद आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवन ने कहा था कि हमारा समय आ गया है। आवर टाइम हैज़ कम। तो यह अनुकूल समय उनके लिए है… तभी हमें फासिज़्म के… सामाजिक-सांस्‍कृतिक फासिज़्म के इस तरह के रूप इस तरह देखने को मिल रहे हैं कि हम क्‍या खायें, क्‍या पहने और क्‍या ओढ़े, हम मीट न खायें, हमारी लड़कियां इस तरह के कपड़े न पहनें और रात में न निकलें नहीं तो उनसे बलात्‍कार हो जायेगा। इस तरह की बहुत सारी घटनायें हैं, इस पर उनके जिस तरह के बयान आते हैं, या कोई घटना हो जाती है, इस तरह से यह क्रम चलता जा रहा है, बढ़ता जा रहा है। और यह लगातार बढ़ता जायेगा क्‍योंकि संघ परिवार के जो और भी संगठन है वह भी अपने हिस्‍से के मांस की की मांग करेंगे। ऐसे में सांस्‍कृतिक फासिज़्म का प्रतिरोध किस तरह से किया जाये। मुझे लगता है कि साहित्‍य का एक ज़रूरी और बड़ा काम है प्रतिरोध करना। रघुवीर सहाय हमकहा करते थे कि सत्‍ता और साहित्‍य का हमेशा छत्तीस का ही आंकड़ा हो सकता है। उसको आगे बढ़ाकर कहा जा सकता है कि वह हमेशा प्रतिरोध करता है। आज जो अंतरराष्‍ट्रीय स्थिति है और हमारे देश की स्थिति है वह यह है कि एक लेखक को, एक कलाकार को ताक़त का प्रतिरोध करना होगा, सत्‍ता का प्रतिरोध करना होगा, बर्बरता का प्रतिरोध करना होगा, सांस्‍कृतिक वर्चस्‍व की जो भी घटनायें हो रही हैं उसका प्रतिरोध करना होगा और दमन का भी प्रतिरोध करना होगा।







गाजा नरसंहार, फिलिस्‍तीनी जनता का महाकाव्‍यात्‍मक प्रतिरोध और इनके ऐतिहासिक निहितार्थ

July 27th, 2014 by Smash Fascism | No Comments

कात्‍यायनी

  • लगभग चार दशकों बाद ऐसा नजारा सामने आया है कि पूरी दुनिया के सैकड़ों शहरों में लाखों लाख लोग जियनवादी नस्‍ली नरसंहार का विरोध करते हुए गाजा के संघर्षरत लोगों के पक्ष में सड़कों पर उतर आये हैं। फिलिस्‍तीनी मुक्ति के पक्ष में यह अन्‍तरराष्‍ट्रीय एकजुटता अपने आप में बहुत कुछ बताती है। इसके महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक निहितार्थ हैं। इसमें भविष्‍य के अहम पूर्वसंकेत छिपे हुए हैं।







Protest demonstrations held in different parts of the country against the barbaric genocide of the Palestinian people by Israel

July 19th, 2014 by Smash Fascism | No Comments

Call for an immediate cessation of the barbaric attack   New Delhi, 18 July 2014. Terming the ongoing Israeli attack on the ordinary citizens of Gaza as genocide, citizens, intellectuals, artists, students-youth, women and social activists held protest demonstrations, distributed pamphlets and took out bicycle rally between 13 July to 18 July in different parts […]


इजरायल द्वारा फिलस्तीनी जनता के बर्बर नरसंहार के खिलाफ देशभर में विरोध-प्रदर्शन

July 18th, 2014 by Smash Fascism | No Comments

13 जुलाई को ‘इंडियन पीपुल इन सॉलिडैरिटी विद गाजा’ के आह्वान पर सुबह 11 बजे दिल्‍ली स्थित इजरायली दूतावास के सामने सैकड़ों लोगों ने जियनवाद-साम्राज्‍यवाद विरोधी, इस्रायल विरोधी व फिलस्‍तीनी जनता के समर्थन में नारे लगाए गए, इजरायल द्वारा नरसंहार का विरोध किया और वहां मौजूद लोगों ने अपनी बात रखी।







गाजा : वे फिर उठेंगे किसी नए प्रगतिकामी संगठन के झंडे तले…

July 11th, 2014 by Smash Fascism | 1 Comment

सुना है कि जब रोम जल रहा था उस समय नीरो बाँसुरी बजा रहा था. अब इसमें अजीब क्या है? हमारे तमाम महापुरुषों का कहना है कि ‘कला कला के लिये’ होती है और उसे दीन-दुनिया से कुछ लेना-देना नहीं होता. कला के प्रति इतना गहरा समर्पण कम ही देखने को मिलता है. पर आज के नीरो आधुनिक हैं. वे बाँसुरी नहीं बजाते. जब फिलिस्तीनी नागरिक महिलायें और मासूम बच्चे इसरायली बमबारी में मारे जा रहे होते हैं उया वक़्त वे फुटबाल के या क्रिकेट के मैच देखते हैं. खेल भी तो भाईचारे की भावना को बढ़ाते हैं. आधुनिक नीरो बमबारी का जवाब भाईचारे से दे रहे हैं – मगर अपने तरीके से.







भविष्‍य के पूर्वसंकेत और रचनाकारों-कलाकारों-बुद्धिजीवियों से एक अपील : कुछ ठोस प्रस्‍ताव

June 10th, 2014 by Smash Fascism | No Comments

जाने-माने लेखक यू.आर.अनंतमूर्ति को ‘नमो ब्रिगेड’ और शिमोगा की भाजपा इकाई ने पाकिस्‍तान जाने का टिकट भिजवाया है। वे लगातार आतंक के साये में जी रहे हैं। यह तो ”अच्‍छे दिनों” की मात्र एक शुरुआत है। मोदी सरकार ”विकास” के नाम पर शान्ति क़ायम करने के लिए मज़दूरों पर जमकर कहर बरपा करेगी, भारी आबादी को उजाड़कर पूँजीपतियों को जल-जंगल-जमीन औने-पौने भावों पर सौंपा जायेगा और दूसरी ओर सड़कों पर फासिस्‍ट गिरोह जमकर उपद्रव-उत्‍पात मचायेंगे और धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों तथा सभी सेक्‍युलर-जनवादी-प्रगतिशील ताकतों को निशाना बनायेंगे।







विदा कॉमरेड मुकुल सिन्‍हा! लाल सलाम!!

June 10th, 2014 by Smash Fascism | No Comments

साम्‍प्रदायिक फासीवाद विरोधी अभियान के अनथक योद्धा, नागरिक अधिकार कर्मी और वामपंथी ऐक्टिविस्‍ट कॉमरेड मुकुल सिन्‍हा का निधन आज के कठिन समय में जनवादी अधिकार आंदोलन और वामपंथ के लिए एक भारी क्षति है, जिसकी पूर्ति आसानी से संभव नहीं। का. मुकुल सिन्‍हा किताबी आदमी नहीं थे। वे विचारों और व्‍यवहार की दुनिया में समान रूप से सक्रिय थे। वे सच्‍चे अर्थों में जनता के पक्ष में खड़े बुद्धिजीवी थे और न्‍याय-संघर्ष के जुझारू योद्धा थे।







सीमा आजाद के बहाने विरोध की आवाज को कुचलने की साजिश

June 12th, 2012 by Smash Fascism | 1 Comment

हम इस फैसले की घोर निंदा करते हैं और आम जनता से अपील करते हैं कि वह मामले की तह तक जाय और सरकार के इस जनविरोधी चेहरे को बेनकाब करे। हम अंग्रेजों द्वारा बनाए गए उस कानून को समाप्त करने की भी मांग करते हैं जिसके तहत आए दिन सामाजिक कार्यकर्ताओं को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है और सालों-साल बगैर मुकदमा चलाए जेलों में रखा जाता है। यही स्थिति विनायक सेन, प्रशांत राही और अरुण पेरेरा की हुई। ऐसी ही हालत में भारत की जेलों में सैकड़ों हजारों युवकांे को ‘देशद्रोही’ करार देते हुए बंद रखा गया है। सीमा आजाद और विश्व विजय का मामला सभी जनतंत्रप्रेमी लोगों के लिए एक चुनौती है जिसका मुकाबला डट कर किया जाना चाहिए।








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फ़ासीवाद, धार्मिक कट्टरपंथ, सांप्रदायिकता संबंधी स्रोत सामग्री

यहां जिन वेबसाइट्स या ब्‍लॉग्‍स के लिंक दिए गए हैं, उन पर प्रकाशित विचारों-सामग्री से हमारी पूरी सहमति नहीं है। लेकिन एक ही स्‍थान पर स्रोत-सामग्री जुटाने के इरादे से यहां ये लिंक दिए जा रहे हैं।
 

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